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अज्ञेय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन कौन थे?

नामसच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
जन्म1911 ईस्वी में कुशीनगर, जिला देवरिया (उत्तर प्रदेश)
पिता का नामपंडित हीरानंद शास्त्री
शिक्षापंजाब से मैट्रिक उत्तीर्ण, मद्रास से इंटर (विज्ञान में) उसके बाद लाहौर से बी.एस.सी. एवं एम.ए. (अंग्रेजी से) की परीक्षा उत्तीर्ण की
कृतियांकाव्य संग्रह – भग्नदूत, चिंता, इत्यलम, हरी घास पर क्षणभर, बावरा अहेरी, आंगन के द्वार, कितनी नावों में कितनी बार। कहानी संग्रह विपथगा, परंपरा, कोठरी की बात, शरणार्थी, जायदोल, तेरे प्रतिरूप, अमर वल्लरी। उपन्यास शेखर एक जीवनी (दो भाग), नदी के द्वीप, अपने अपने अजनबी। निबंध रचना सबरंग कुछ राग, आत्मनेपद, लिखी कागद कोरे। डायरी भवंति, अंतरा, शाश्वती। आलोचना हिंदी साहित्य का आधुनिक परिदृश्य त्रिशंकु
उपलब्धियांअंतरराष्ट्रीय ‘गोल्डन रीथ’ पुरस्कार सहित साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया
मृत्यु1987 ईस्वी

Agyeya Sachidanand Hiranand Vatsyayan का जन्म 7 मार्च 1911 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कुशीनगर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित हीरा नंद शास्त्री था। जो एक पुरातत्व अधिकारी थे।

सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन अज्ञेय की शिक्षा

सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन अज्ञेय ने मैट्रिक तक की पढ़ाई पंजाब के एक प्राइवेट स्कूल से की थी। इसके बाद इन्होंने मद्रास के क्रिस्चियन कॉलेज में एडमिशन लिया और वहा से अपनी इंटर मिडियट की पढ़ाई पूरी की।

तत्पश्चात इन्होंने लाहौर के फॉर्मन कॉलेज से बी.एस.सी. की परीक्षा उत्तीर्ण करके। उसी कॉलेज में एम. ए. अंग्रेजी में प्रवेश लिया। लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ने के कारण इन्होंने पढ़ाई को बीच में ही छोड़ दी थी। और उसके बाद इन्होंने स्वयं से अध्ययन करके अंग्रेजी, हिंदी, फारसी, बंगला और संस्कृत साहित्य का गहन अध्ययन किया।

स्वतंत्रता संग्राम व संग्रह क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहने के कारण इन्हें 4 वर्षों तक कारावास में रखा गया, तथा 2 वर्षों तक नजरबंद भी रखा गया। सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने ‘सैनिक’ एवं ‘विशाल भारत’ नामक पत्रिकाओं का संपादन वर्ष 1936-37 के दौरान किया।

इन्होंने इलाहाबाद से ‘प्रतीक’ पत्रिका निकाली। सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय को ‘दिनमान’ साप्ताहिक, नवभारत टाइम्स, अंग्रेजी पत्र वाक तथा एवरीमेंस पत्र-पत्रिकाओं का संपादन करने का शुभ अवसर भी प्राप्त हुआ।

इन्होंने साहित्य एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘वत्सलनिधि’ नामक न्यास की स्थापना भी की थी। ब्रिटिश सेना और आकाशवाणी में अपनी सेवा देने वाले सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने जोधपुर विश्वविद्यालय तथा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य भी किया है।

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने साहित्य की अनेक विधाओं में लेखन कार्य किया है, जैसे — कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, यात्रा, वृतांत, संस्मरण, डायरी आदि। शामिल है। इन्हे अंतरराष्ट्रीय ‘गोल्डन रीथ‘ पुरस्कार दिया गया था। इनकी महान रचना ‘आंगन के द्वार‘ पर इन्हे साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया है।

तथा ‘कितनी नावों में कितनी बार‘ रचना पर इन्हे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी है। हिंदी साहित्य के इस महान विभूति का 4 अप्रैल, 1987 ईसवी को नई दिल्ली में मृत्यु हो गई थी।

साहित्यिक गतिविधियां

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने जब लेखन कार्य प्रारंभ किया था। तब प्रगतिवादी आंदोलन उफान पर था। सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने तार सप्तक (वर्ष 1943) के माध्यम से प्रयोगवादी काव्य आंदोलन छेड़ दिया था। इस काव्य संकलन में सात प्रयोगवादी कवियों की रचनाएं संग्रहित हैं।

इस संकलन में मानवीय और सरल बोलचाल की भाषाओं को संग्रहित किया गया है। इस नवीन काव्य धारा के लिए अज्ञेय जी को बुद्धिजीवियों का विरोध भी झेलना पड़ा था। इन पर पश्चिमी काव्य शिल्प की नकल करने का आरोप लगा था।

जिसके बाद अज्ञेय ने प्रयोगवादी आंदोलन को जारी रखते हुए। दूसरे सप्तक और तीसरे सप्तक का प्रकाशन भी किया। इन काव्य संकलनों का संपादन करके अज्ञेय ने भारतेंदु के बाद एक दूसरे आधुनिक युग का विकास किया है।

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कृतियां

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय की रचनाओं का विस्तार अति विस्तृत है। इन्होंने साहित्य की गद्य एवं पद्य दोनों विषयों में भरपूर लेखन कार्य किया है। इनकी रचनाओं में

कविता संग्रह – भग्नदुत, चिंता, इत्यला, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, इंद्रधनुष रौंदे हुए थे, आंगन के द्वार, कितनी नावों में कितनी बार, अरी ओ करुणामय प्रभामय।

कहानी संग्रह – विपगथ, परंपरा, कोठरी की बात, शरणार्थी, जयदोल, तेरे ये प्रतिरूप, अमर वल्लरी।

उपन्यास – शेखर ; एक जीवनी (दो भाग), नदी के द्वीप, अपने अपने अजनबी।

निबंध संग्रह – सब रंग और कुछ राग, आत्मनेपद, लिखी कागद कोरे।

नाटक – उत्तर प्रियदर्शी।

यात्रा वृतांत – अरे! यायावर रहेगा याद, एक बूंद सहसा उछली।

डायरी – भवंति, अंतरा, शाश्वती।

संस्मरण – स्मृति लेखा।

आलोचना – हिंदी साहित्य  ;  एक आधुनिक परिदृश्य, त्रिशंकु।

अंग्रेजी काव्य कृति – प्रिजन डेज एंड अदर पियम्स प्रमुख है। अज्ञेय की लगभग समग्र काव्य रचनाएं ‘सदानीरा’ (भाग – 1 एवं भाग – 2) तथा सारे निबंध ‘केंद्र और परिधि’ नामक ग्रंथ में संकलित है।

About FAQ

Q. Agyeya?

Ans. Agyeya ek Pragativaadi kavi the.

Q. Sachidanand Hiranand Vatsyayan Agay?

Ans. Sachidanand Hiranand Vatsyayan Agay ek Pragativaadi kavi the.

Q. Agyeya ka janm kahan hua tha?

Ans. Agyeya ka janm 7 March 1911 ko Uttar Pradwsh ke dewariya jila ke khushinagar mei ek brahman pariwar mei hua tha.

Q. Sachidanand Hiranand Vatsyayan kis rajya ke rehne wale the?

Ans. Sachidanand Hiranand Vatsyayan ka janm 7 March 1911 ko Uttar Pradwsh ke dewariya jila ke khushinagar mei ek brahman pariwar mei hua tha.

Q. Sachidanand Hiranand Vatsyayan ka janm kab hua tha?

Ans. Sachidanand Hiranand Vatsyayan ka janm 7 March 1911 ko Uttar Pradwsh ke dewariya jila ke khushinagar mei ek brahman pariwar mei hua tha.

Q. Sachidanand Hiranand Vatsyayan kis yug ke pramukh kavi hai?

Ans. Sachidanand Hiranand Vatsyayan Agay ek Pragativaadi kavi the.

निष्कर्ष

हमें उम्मीद है. आप सभी विजिटर को Agyeya Sachidanand Hiranand Vatsyayan के बारे में पूरी जानकारी मिल ही गई होगी. यदि आप लोगो को कोई डाउट है. तो आप हमें कमेंट करके बता सकते है. यदि आप लोगो को यह लेख अच्छा लगा है. तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

Note : यह जानकारी विभिन्न वेबसाईट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गहराई से रिसर्च करके एकत्रित की गई है। यदि इस जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है. तो इसके लिए bioknowledge.net की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है.

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