Bal Gangadhar Tilak एक राजनीतिक, शिक्षक और स्वतंत्रता संग्रामी नेता थे। इन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलवाने और शिक्षा को बढ़ाने का पूर्ण जोर दिया था। इनके द्वारा बहुत से योगदान किए गए है। महात्मा गांधी से पहले यह एक बहुत बड़े नेता थे।

लेकिन दोनो के विचार तो एक ही थे। भारत को स्वतंत्रता दिलवाना। लेकिन महात्मा गांधी नरम दल के नेता थे। ओर वही Bal Gangadhar Tilak एक गरम दल के नेता थे। मतलब महात्मा गांधी कहते थे। अगर कोई एक गाल में मारे तो हमे अपना दूसरा गाल भी कर देना चाहिए।

ओर वही Bal Gangadhar Tilak का कहना था। अगर कोई हमे एक मारेगा, तो हम उन्हे दो मारेगे। इसी कारण से दोनो की बनी नही और दोनो अपने अपने रास्ते में चलते रहे।

आज इस आर्टिकल में हम Bal Gangadhar Tilak Biography in Hindi, Bal Gangadhar Tilak Death, Bal Gangadhar Tilak Wife, Bal Gangadhar Tilak Family, Bal Gangadhar Tilak Wiki & More के बारे में पढेगे.

Table of Contents

बाल गंगाधर तिलक कौन थे? | Who was Bal Gangadhar Tilak?

नामबाल गंगाधर तिलक
अन्य नामलोकमान्य तिलक
प्रसिद्ध हैस्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक
जन्म23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिखली गांव में हुआ था
मृत्यु1 अगस्त 1920 को महाराष्ट्र में
राष्ट्रीयताभारतीय
हाईट1.65 मीटर
पत्नीसत्यभामाबाई तिलक
धर्महिंदू
पिता का नामश्री गंगाधर तिलक
माता का नामपार्वती बाई गंगाधर
पढ़ाईमहाराष्ट्र से
बच्चेतीन बच्चे थे
मांग कीपूर्ण स्वराज्य की
नारा दिया थास्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है
स्थापनाएनी बेसेंट के साथ मिलकर होमरूल लीग की स्थापना 1916 में की
पार्टीकांग्रेस 1890 में जुड़े थे
अखबारमराठी भाषा में केसरी और अंग्रेजी भाषा में मराठा अखबार

Bal Gangadhar Tilak के बचपन का नाम केशव था। बाद में इनके प्रचलन होने के साथ साथ इनका नाम Bal Gangadhar Tilak हो गया था। बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिखली गांव में एक हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

इनके पिता का नाम श्री गंगाधर तिलक था। जो स्कूल में एक संस्कृत के अध्यापक थे। इनकी माता का नाम पार्वती बाई तिलक है। जो एक ग्रहणी थी।

बाल गंगाधर तिलक की पढ़ाई के बारे में | About Bal Gangadhar Tilak’s studies

Bal Gangadhar Tilak ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव से कंप्लीट की थी। ओर जब Bal Gangadhar Tilak 16 साल के थे। तो इनके पिता की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद से Bal Gangadhar Tilak के उपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। ओर उनकी पढ़ाई में भी काफी दिक्कत आने लगी थी।

लेकिन उन्होंने हार नही मानी। वह एक होसियार छात्र थे। वह गणित के ज्ञानी व्यक्ति थे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए। Bal Gangadhar Tilak ने पुणे के एक स्कूल में बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया था। ओर उसी से अपने परिवार का पालन पोषण करने लगे थे। ओर अपनी आगे की पढ़ाई भी इन्होंने की।

इन्होंने पुणे के एक कॉलेज से स्नातक किया जिसमे इन्होंने मैथ्स में फर्स्ट डिवीजन से स्नातक पास किया था। ओर इन्होंने 1977 में M.A की पढ़ाई के लिए इन्होंने एडमिशन लिया। लेकिन बाद में इन्होंने देश की हालत को देखते हुए, वकालत की डिग्री हासिल करने का फैसला लिया। ओर इन्होंने LLB की डिग्री 1979 में हासिल कर ली थी।

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बाल गंगाधर तिलक की पत्नी और बच्चो के बारे में | About Bal Gangadhar Tilak’s Wife and Children

बाल गंगाधर तिलक की शादी 1971 में मात्र 16 साल की उम्र में सत्यभामाबाई तिलक से हो गई थी। जिससे इनकी तीन संताने हुई थी। तीनों इनके लड़के थे। पहले लड़के का नाम श्रीधर बलवंत तिलक था। जो एक लेखक थे। दूसरे लड़के का नाम रामभाऊ बलवन्त तिलक था। ओर तीसरे लड़के का नाम विश्वनाथ बलवन्त तिलक था।

बाल गंगाधर तिलक का शुरुआती जीवन | Early Life of Bal Gangadhar Tilak

बाल गंगाधर तिलक मैथ्स के ज्ञाता थे, वह शुरुआत में पुणे के एक स्कूल में मैथ्स के टीचर थे। इन्होंने भारत की शिक्षा की स्थिति को देखते हुए। क्युकी उस समय भारत की शिक्षा की स्थिति एक दम जीरो थी।

हालांकि बहुत से लोगो ने उसको देखते हुए जैसे राजाराम मोहन राय, गोपाल कृष्ण गोखले और बाल गंगाधर तिलक ने शिक्षा को काफी प्रोत्साहन दिया था। ओर उसी को देखते हुए बाल गंगाधर तिलक ने अपने दोस्तो के साथ मिलकर 1980 में एक इंग्लिश स्कूल की स्थापना कर दी थी।

ओर बाद में बाल गंगाधर तिलक ने 1884 में डेक्कन सोसायटी की स्थापना की थी। ओर इसी सोसायटी ने 1885 में बहुत फेमस कॉलेज फर्ग्यूसन कॉलेज की स्थापना की थी। यह कॉलेज मुंबई में स्थित है। कॉलेज की स्थापना होने के बाद बाल गंगाधर तिलक ने इसी स्कूल बच्चों को मैथ पढ़ाई थी। क्युकी बाल गंगाधर तिलक मैथ्स के बहुत ज्यादा ज्ञानी टीचर थे।

बाल गंगाधर तिलक का राजनीतिक करियर | Political career of Bal Gangadhar Tilak

बाल गंगाधर तिलक शुरुआती दौर में एक टीचर थे। लेकिन बाद में उन्होंने 1885 में टीचरिंग लाइन को छोड़कर, पॉलिटिकल करियर में प्रवेश करने का फैसला लिया। ओर 1890 में बाल गंगाधर तिलक ने इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी को ज्वाइन किया।

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बाल गंगाधर तिलक द्वारा केसरी और मराठा अखबार का प्रकाशन | Kesari and Maratha newspaper publication by Bal Gangadhar Tilak

1881 में बाल गंगाधर तिलक ने दो अखबार रिलीज किए। केशरी अखबार जो मराठी भाषा में था। ओर मराठा अखबार जो इंग्लिश भाषा में था। यह हमेशा से कहते थे, हमे स्वराज्य देश चाहिए।

स्वराज्य शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग दयानंद सरस्वती ने किया था। यह अपने अखबार में गीता के बहुत ही अच्छे अच्छे श्लोक लिखते थे। जिसको पढ़ने के बाद भारतीयों के अंदर स्वतंत्रता की भावना जाग जाती थी।

बाल गंगाधर तिलक के विचारो से प्रभावित होकर चापेकर ब्रदर्स द्वारा मारे गए अधिकारी | Influenced by Bal Gangadhar Tilak’s ideas, officers killed by Chapekar Brothers

1886 में देश में प्लेग नाम की बीमारी फेल गई थी। जिससे काफी लोग गृषित हुए थे। परंतु उस समय ब्रिटिश ने हम भारतीयों को परेशान करना चालू कर दिए था। क्युकी वह उन लोगो से नॉर्मली बात नहीं करते थे। जिनको प्लेग था। वह उनके साथ बदसलूकी करते थे।

ओर कोई व्यक्ति को अगर प्लेग हुआ, तो वह उन्हें कैंप में फिकवा देते थे। जिससे भारतीयों को काफी ठेस पहुंची। ओर इसी को देखते हुए बाल गंगाधर तिलक ने अपने अखबार में एक बात छापी थी, जो भागवत गीता में लिखी थी, उन्होंने श्रीकृष्ण और अर्जुन का एक वाक्य लिखा था, की “अधर्म को कम करने के लिए अगर अधर्मियो को मारना पड़े, तो वह अधर्म नहीं होता है”।

उनके इस वाक्य को पढ़कर चापेकर ब्रदर्स बंधु काफी भड़क गए। ओर चापेकर ब्रदर्स ने कमिश्नर लैंड और लेफ्टिनेंट आयेर्स्ट को मार दिया था। जिसका पूरा इल्जाम बाल गंगाधर तिलक के उपर आ गया था। ओर उन्हे 18 महीनो के लिए जेल में डाल दिया था। ओर यही से कांग्रेस बटना शुरू हो गई थी।

बंगाल विभाजन | Bengal Partition

1905 में जब बंगाल का बटवारा हुआ, तो बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय ओर विपिन चंद्र पाल तीनो ने मिलकर इससे निपटने का फैसला किया। इन्ही तीनों को ही लाल बाल पाल कहा जाता था।

क्युकी कांग्रेस जो थी वह एक नरम दल की थी। ओर बाल गंगाधर तिलक एक गर्म मिजाजी व्यक्ति थे। यह गरम दल के नेता थे। इन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली लोग इनसे जुड़ने लगे।

ओर बाल गंगाधर तिलक ने एक नारा दिया था “स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे हम लेकर रहेंगे”। स्वदेशी आंदोलन चालू हो गया था। की हम विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

सूरत अधिवेशन | Surat session

1907 में सूरत अधिवेशन होता है। जिसकी अध्यक्षता रास बिहारी घोष करते है। परंतु लोग चाहते थे, की यह अधिवेशन नागपुर में हो। अगर नागपुर में होता तो, लाला लाजपत राय या बाल गंगाधर इसकी अध्यक्षता करते। परंतु ऐसा न होने के कारण सूरत अधिवेशन में काफी हंगामा हुआ। ओर यही से ही कांग्रेस दो पार्ट नरम दल और गरम दल में विभाजित हो गई।

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बाल गंगाधर तिलक द्वारा लिखी गई भागवत गीता | Bhagwat Geeta by Bal Gangadhar Tilak

1908 में खुदीराम बोस जब 16 साल के थे, खुदीराम बोस के साथ प्रफुल्ल चक्के भी थे। तो उन्होंने मुजफ्फरपुर के मेजिस्ट्रेड किंग्सफोर्ड को मारने की कोशिश की थी। लेकिन मैजिस्ट्रेड नहीं मरा। परंतु वहा पर उपस्थित दो ब्रिटिशियन औरते मर गई थी।

ओर इन्हे जब पकड़ने के लिए ब्रिटिश आए, तो प्रफुल चक्के ने वही पर सायनाइट खा लिया था। जिससे प्रफुल्ल चक्के वही पर मर गए थे। परंतु खुदीराम बोस को पकड़कर 30 अप्रैल 1908 को फांसी दे दी गई थी। ओर यह पूरा इल्जाम बाल गंगाधर तिलक के ऊपर आया।

क्युकी वह एक गरम दल के नेता थे। जितनी भी हिंसा होती थी। सारा इल्जाम बाल गंगाधर तिलक के ऊपर ही आता था। इल्जाम लगने के बाद बाल गंगाधर तिलक को 6 साल की सजा हो गई थी। ओर 1 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।

इन्हे सजा के लिए बर्मा भेजा गया, मंडाले जेल में। इनका केस मोहम्मद अली जिन्ना लड़ रहे थे। बाल गंगाधर तिलक ने इसी जेल में गीता रहस्य लिख दी थी। 16 जून 1914 को जब बाल गंगाधर रिहा हो कर आए, तो उनके द्वारा चलाए गए सारे आंदोलन ठप्प हो गए थे।

होमरूल लीग की स्थापना | Establishment of Home Rule League

1916 में बाल गंगाधर तिलक ने फिर से कांग्रेस ज्वाइन की। ओर 2016 में एनी बेसेंट के साथ मिलकर होमरुल लीग की स्थापना की। इस रूल का भी सिर्फ एक ही मकसद था। देश हमारा पूर्णतया स्वराज्य हो जाए। हालांकि यह आंदोलन अधिक समय तक नहीं चल पाया था।

ओर 1918 में ही इस आंदोलन का प्रभाव कम हो गया था। लेकिन जब इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी, तो इस आंदोलन में सिर्फ 1400 व्यक्ति ही शामिल थे। लेकिन एक साल के अंदर ही इस आंदोलन में 32,000 व्यक्ति शामिल हो गए थे। जिसके कारण इस होमरुल लीग ने अपनी एक अलग ही छाप छोड़ दी थी। इस लीग ने भारत के कई राज्य कवर कर लिए थे।

बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु | Death of Bal Gangadhar Tilak

13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला कांड होने के बाद बाल गंगाधर तिलक को काफी ठेस पहुंची। जिससे इनका स्वास्थ्य काफी बिगड़ गया। और इनकी हालत काफी बिगड़ गई थी। और 1 अगस्त 1920 को मुंबई में इनकी मृत्यु हो गई थी।

ओर हम भारतीयों ने एक महान समाज सुधारक नेता बाल गंगाधर तिलक को खो दिया था। उन्होंने देश की आजादी के लिए बहुत से प्रयास किए थे। हम लोग ऐसे देशवासियों को कभीं भी नहीं भूल सकते है।

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About FAQ

Q. बाल गंगाधर तिलक के नारे?

Ans. बाल गंगाधर तिलक ने बंगाल विभाजन के बाद नारा दिया था। “स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, और इसे हम लेकर रहेंगे”।

Q. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के स्वदेशी संबंधी विचारों को स्पष्ट कीजिए?

Ans. बाल गंगाधर तिलक ने बंगाल विभाजन के बाद से एक पहल शुरू की थी। उन्होंने विदेशी वस्तुओं का त्याग कर स्वदेशी वस्तुओ को अपनाने पर जोर दिया था। ओर यह काफी संभव हो गया था। लेकिन जेल में जाने के बाद से इस आंदोलन में कमी आ गई थी।

Q. बाल गंगाधर तिलक किस दल के नेता थे?

Ans. बाल गंगाधर तिलक ने 1890 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की पार्टी ज्वाइन की थी। वह एक कांग्रेसी नेता थे, लेकिन वह गरम मिजाजी व्यक्ति थे। ओर उनका अपना एक अलग दल था। जिसे हम गरम दल कहते है।

Q. बाल गंगाधर तिलक का जन्म कब हुआ था?

Ans. बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिखली गांव में एक हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

Q. बाल गंगाधर तिलक के आर्थिक विचार?

Ans. बाल गंगाधर के विचार थे, की हमे हमारा देश पूर्णतया स्वराज्य चाहिए।

Q. बाल गंगाधर तिलक ने मराठा पत्रिका का प्रकाशन किस भाषा में किया?

Ans. 1881 में बाल गंगाधर तिलक ने दो अखबार रिलीज किए थे। केशरी अखबार जो मराठी भाषा में था। ओर मराठा अखबार जो इंग्लिश भाषा में था।

Q. बाल गंगाधर तिलक के पिता का नाम?

Ans. बाल गंगाधर के पिता का नाम श्री गंगाधर तिलक था।

Q. बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु कब हुई?

Ans. बाल गंगाधर की मृत्यु 1 अगस्त 1920 को मुंबई में हो गई थी।

निष्कर्ष

हमें उम्मीद है. आप सभी विजिटर को Bal Gangadhar Tilak के बारे में पूरी जानकारी मिल ही गई होगी. यदि आप लोगो को कोई डाउट है. तो आप हमें कमेंट करके बता सकते है. यदि आप लोगो को यह लेख अच्छा लगा है. तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

Note : यह जानकारी विभिन्न वेबसाईट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गहराई से रिसर्च करके एकत्रित की गई है। यदि इस जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है. तो इसके लिए bioknowledge.net को आप तुरंत कमेंट करके इन्फॉर्म करे.

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