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जयशंकर प्रसाद कौन थे?

नामजयशंकर प्रसाद
जन्म1889 ईसवी में काशी (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था
पिता का नामश्री देवी प्रसाद साहू
शिक्षाबनारस के क्वींस कॉलेज से आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त की
कृतियांकाव्य संग्रह कामायनी, आंसू, लहर, झरना, चित्राधारा प्रेम पथिक। नाटक स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामी, जन्मेजय का नाग यज्ञ, एक घूट, विशाख, अजातशत्रु, राज्यश्री, कामना, प्राश्चित आदि। कहानी संग्रह प्रतिध्वनि, छाया, आकाशदीप, आंधी, इंद्रजाल। उपन्यास कंकाल, तितली, इरावती। निबंध संग्रह काव्य कला तथा अन्य निबंध
उपलब्धियांनागरी प्रचारिणी सभा के उपाध्यक्ष बनाए गए तथा, (कामायनी) पर मंगलाप्रसाद पारितोषिक सम्मान से सम्मानित किए गए
मृत्यू1937 ईस्वी

Jaishankar Prasad का जन्म 1889 ईस्वी में काशी के अत्यंत प्रतिष्ठित सुंघनी साहू के वैश्य परिवार में हुआ था। यह छायावाद के प्रतिष्ठित महाकवि थे। जयशंकर प्रसाद के दादा का नाम शिवरत्न साहू था। और इनके पिता का नाम देवी प्रसाद साहू था। बचपन में ही इनके माता पिता और इनके बड़े भाई का स्वर्गवास हो गया था। जिससे जयशंकर प्रसाद के ऊपर उनके घर का और उनके व्यवसाय का पूरा भार उनके ऊपर ही आ गया था।

जयशंकर प्रसाद की पत्नी और बच्चो के बारे में

जयशंकर प्रसाद जी का पहला विवाह 1909 ई॰ में विंध्यवासिनी देवी के साथ हुआ था। परन्तु उनकी पत्नी को क्षय रोग था। और इसी बीमारी के कारण सन् 1916 ई॰ में विंध्यवासिनी देवी का निधन हो गया था। और उसी कारण से इनके घर में क्षय रोग के कीटाणु प्रवेश कर गये थे।

सन् 1917 ई॰ में जयशंकर प्रसाद ने सरस्वती देवी के साथ दूसरा विवाह किया। दूसरा विवाह होने के बाद जयशंकर प्रसाद की पहली पत्नी की साड़ियों, गहने आदि वस्तुओ का उपयोग करने के कारण जयशंकर प्रसाद की दूसरी पत्नी को कुछ समय के बाद उन्हें भी क्षय रोग हो गया और दो ही वर्ष बाद 1919 ई॰ में इनका भी देहांत प्रसूतावस्था में क्षय रोग से ही हुआ था।

इसके बाद जयशंकर प्रसाद ने कभी भी दूसरा घर बसाने की लालसा नहीं की, परंतु अनेक लोगों के समझाने और सबसे अधिक अपनी भाभी के प्रतिदिन के शोकमय जीवन को सुलझाने के लिए उन्हें बाध्य होकर विवाह करना पड़ा। सन् 1919 ई॰ में उन्होंने तीसरा विवाह कमला देवी के साथ किया। जिससे उनका एकमात्र पुत्र रत्नशंकर प्रसाद ने जन्म लिया. जिनका जन्म सन् 1922 ई॰ में हुआ था। यह उनकी तीसरी पत्नी की ही संतान थे.

जयशंकर प्रसाद की शिक्षा

जयशंकर प्रसाद ने घर पर ही स्वंम अध्यन करके अंग्रेजी, हिंदी, बंगला, उर्दू, फारसी, संस्कृत आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। उसके बाद इन्होंने बनारस के ‘क्वींस कॉलेज’ एडमिशन लेकर मात्र 8 तक ही पढ़े। अपने पैतृक कार्य को करते हुए।

जयशंकर प्रसाद ने अपने भीतर काव्य प्रेणना को जीवित रखा। जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध लेखन रचना ‘कामायनी‘ पर मंगलाप्रसाद पारितोषिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। और अंत में स्वयं जयशंकर प्रसाद भी क्षय रोग से ग्रस्त हो गये थे।

उसके बाद जयशंकर प्रसाद ने लम्बे समय तक एलोपैथिक का इलाज करवाने के बाद इन्होने होमियोपैथिक तथा कुछ समय आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लेने के बावजूद भी यह क्षय रोग से मुक्त न हो सके और अंततः इसी रोग के कारण इनका देहांत 15 नवंबर, 1937 को काशी में सोमवार के दिन को प्रातःकाल 48 वर्ष की आयु में हो गया था।

साहित्यिक गतिविधियां

जयशंकर प्रसाद की साहित्यक गतिविधियों के काव्य में प्रेम और सौंदर्य प्रमुख विषय रहे है। जयशंकर प्रसाद की सोच एक मानवतावादी थी। जयशंकर प्रसाद सबसे ज्यादा संत रहने वाले प्रतिभासम्पन्न व्यक्ति थे। जयशंकर प्रसाद ‘नगरी प्रचारिणी सभा के उपाध्यक्ष थे।

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कृतियां

जयशंकर प्रसाद ने कुल 67 रचनाए लिखी है।

जयशंकर प्रसाद की प्रमुख काव्य क्रतियो में चित्राधार, प्रेमपथिक, लहर, कमायिनी, कानन कुसुम, झरना, आसू आदि शामिल है।

जयशंकर प्रसाद की चार प्रबंधनात्मक कविताएं अत्यंत चर्चित में रही है। उनके नाम है – शेरसिंह का शास्त्र समर्पण, प्रलय की छाया, पेशोला की प्रतिध्वनि तथा अशोक की चिंता

नाटकचंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, जन्मेजय का नाग यज्ञ, राजश्री,  आजाद शत्रु, प्रायश्चित आदि
उपन्यासकंकाल, तितली एवं इरावती। यह अपूर्ण रचनाए है
कहानी संग्रहप्रतिध्वनि, छाया, आकाशदीप, आंधी आदि
निबंध संग्रहकाव्य और कला

About FAQ

Q. What is the name of Jaishankar Prasad?

Ans. Jaishankar Prasad was the eminent great poet of Chhayavad.

Q. How did Jaishankar Prasad die?

Ans. Facing extreme extreme conditions. Jaishankar Prasad died on 15 November 1937 in Kashi.

Q. Where did Jaishankar Prasad study?

Ans. Jaishankar Prasad had acquired knowledge of languages ​​like English, Hindi, Bangla, Urdu, Persian, Sanskrit etc. by studying himself at home. After that he took admission in ‘Queen’s College’ of Banaras and studied only till 8.

Q. Where was Jaishankar Prasad born?

Ans. Jaishankar Prasad was born in the Vaishya family of Sunghani Sahu of Kashi in 1889 AD.

Q. When and where was Jaishankar Prasad born?

Ans. Jaishankar Prasad was born in the Vaishya family of Sunghani Sahu of Kashi in 1889 AD.

Q. When did Jay Shankar Prasad born?

Ans. Jaishankar Prasad was born in the Vaishya family of Sunghani Sahu of Kashi in 1889 AD.

Q. When was born Jay Shankar Prasad?

Ans. Jaishankar Prasad was born in the Vaishya family of Sunghani Sahu of Kashi in 1889 AD.

Q. When was Jaishankar Prasad dead?

Ans. Facing extreme extreme conditions. Jaishankar Prasad died on 15 November 1937 in Kashi.

निष्कर्ष

हमें उम्मीद है. आप सभी विजिटर को Jaishankar Prasad के बारे में पूरी जानकारी मिल ही गई होगी. यदि आप लोगो को कोई डाउट है. तो आप हमें कमेंट करके बता सकते है. यदि आप लोगो को यह लेख अच्छा लगा है. तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

Note : यह जानकारी विभिन्न वेबसाईट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गहराई से रिसर्च करके एकत्रित की गई है। यदि इस जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है. तो इसके लिए bioknowledge.net की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है.

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